vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना
»
श्लोक 39
श्लोक
2.20.39
सा बहून्यमनोज्ञानि वाक्यानि हृदयच्छिदाम्।
अहं श्रोष्ये सपत्नीनामवराणां परा सती॥ ३९॥
अनुवाद
‘मैं बड़ी रानी होने पर भी अपनी छोटी सहेलियों से बहुत-से अप्रिय वचन सुनती हूँ, जिनके वचन मेरे हृदय को चुभ जाते हैं।॥39॥
‘Even though I am the eldest queen, I have to listen to many unpleasant words from my younger co-wives whose words pierce my heart.॥ 39॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd