श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.20.36 
यदि पुत्र न जायेथा मम शोकाय राघव।
न स्म दु:खमतो भूय: पश्येयमहमप्रजा:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'पुत्र रघुनन्दन! यदि तुम न जन्मे होते, तो मुझे केवल इसी बात का दुःख होता। आज मुझ पर जो महान दुःख आया है, यदि मैं बांझ होती, तो यह दुःख मुझे न देखना पड़ता।'
 
‘Son Raghunandan! If you had not been born, I would have been saddened by this one thing only. The great sorrow that has befallen me today, I would not have had to see it if I were barren.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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