श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.20.24 
सत्यप्रतिज्ञं पितरं राजानं पश्य राघव।
अद्यैव त्वां स धर्मात्मा यौवराज्येऽभिषेक्ष्यति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! अब तुम अपने सत्यवादी पिता राजा से मिलो। वे धर्मात्मा राजा आज ही तुम्हारा युवराज पद पर अभिषेक करेंगे।'॥24॥
 
‘Raghunandan! Now you go and meet your truthful father, the king. That righteous king will anoint you as the crown prince today itself.'॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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