श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.20.23 
वृद्धानां धर्मशीलानां राजर्षीणां महात्मनाम्।
प्राप्नुह्यायुश्च कीर्तिं च धर्मं चाप्युचितं कुले॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'पुत्र! तुम पुण्यात्मा, वृद्ध और महान राजाओं के समान दीर्घायु, यश और कुल के योग्य धर्म को प्राप्त करो॥ 23॥
 
'Son! May you attain longevity, fame and the religion befitting your family like the virtuous, aged and great kings.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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