श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 20: राजा दशरथ की अन्य रानियों का विलाप, श्रीराम का कौसल्याजी को अपने वनवास की बात बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.20.10 
दृष्ट्वैव तु तदा रामं ते सर्वे समुपस्थिता:।
जयेन जयतां श्रेष्ठं वर्धयन्ति स्म राघवम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग विजयी वीरों में श्रेष्ठ रघुनन्दन श्री राम को देखकर उनकी जयजयकार करते हुए आगे आए और उन्हें बधाई देने लगे॥10॥
 
All of them, upon seeing Raghunandan Sri Ram, the best of all victorious heroes, came forward hailing him and started congratulating him. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)