श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.19.8 
किं पुनर्मनुजेन्द्रेण स्वयं पित्रा प्रचोदित:।
तव च प्रियकामार्थं प्रतिज्ञामनुपालयन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'फिर यदि महाराज स्वयं मेरे पिता मुझे आज्ञा दें और वह भी आपका प्रिय कार्य करने के लिए, तो मैं अपनी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए वह कार्य क्यों न करूँ?॥8॥
 
'Then if Maharaj himself - my father - orders me and that too to do your favourite work, then why would I not do that work keeping my promise?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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