श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.19.7 
अहं हि सीतां राज्यं च प्राणानिष्टान् धनानि च।
हृष्टो भ्रात्रे स्वयं दद्यां भरतायाप्रचोदित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'यदि आप ऐसा कहें तो मैं यह राज्य, सीता, अपना प्राण तथा अपनी सारी सम्पत्ति अपने भाई भरत को सहर्ष दे सकता हूँ।
 
'Only if you say so, I can gladly give this kingdom, Sita, my beloved life and all my wealth to my brother Bharata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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