श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 19: श्रीराम का वन में जाना स्वीकार करके उनका माता कौसल्या के पास आज्ञा लेने के लिये जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.19.23 
अनुक्तोऽप्यत्रभवता भवत्या वचनादहम्।
वने वत्स्यामि विजने वर्षाणीह चतुर्दश॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि मेरे पूज्य पिता ने स्वयं मुझसे ऐसा नहीं कहा है, फिर भी आपके आग्रह पर मैं इस पृथ्वी पर निर्जन वन में चौदह वर्ष तक निवास करूँगा॥ 23॥
 
'Although my revered father himself has not told me so, yet on your insistence I will reside in a deserted forest on this earth for fourteen years.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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