श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.18.8 
चिन्तयामास चतुरो राम: पितृहिते रत:।
किंस्विदद्यैव नृपतिर्न मां प्रत्यभिनन्दति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पिता का हित करने में सदैव तत्पर रहने वाले अत्यन्त चतुर श्री राम सोचने लगे कि, ‘आज क्या हुआ कि महाराज मुझसे प्रसन्नतापूर्वक बात नहीं कर रहे हैं?’ 8.
 
The very clever Shri Ram, who is always ready to do good for his father, started thinking, 'What happened today that Maharaj is not speaking to me in a happy manner?' 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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