श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.18.36 
भरतश्चाभिषिच्येत यदेतदभिषेचनम्।
त्वदर्थे विहितं राज्ञा तेन सर्वेण राघव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'रघुनन्दन! राजा ने आपके लिए जो अभिषेक सामग्री रखी है, उन सबका उपयोग करके भरत का अभिषेक यहीं करना चाहिए।' 36.
 
'Raghunandan! Bharata should be anointed here using all the materials for the anointment that the king has arranged for you. 36.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd