श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.18.34 
यदि सत्यप्रतिज्ञं त्वं पितरं कर्तुमिच्छसि।
आत्मानं च नरश्रेष्ठ मम वाक्यमिदं शृणु॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'नरश्रेष्ठ! यदि तुम अपने पिता को सत्यवादी बनाना चाहते हो और स्वयं भी सत्यवादी सिद्ध करना चाहते हो तो मेरी बात सुनो ॥34॥
 
'Narshrestha! If you want to make your father a truthful person and you also want to prove yourself truthful then listen to me. 34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd