श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.18.33 
तत्र मे याचितो राजा भरतस्याभिषेचनम्।
गमनं दण्डकारण्ये तव चाद्यैव राघव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'राघव! मैंने एक वरदान के द्वारा राजा से यह प्रार्थना की है कि भरत को राजा बनाया जाए और दूसरे वरदान के द्वारा मैंने आपसे आज ही दण्डकारण्य में भेज देने को कहा है।
 
'Raghava! Through one of those boons, I have requested the King that Bharata be crowned king and through the other boon, I have asked for you to be sent to Dandakaranya today itself.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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