श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.18.32 
पुरा देवासुरे युद्धे पित्रा ते मम राघव।
रक्षितेन वरौ दत्तौ सशल्येन महारणे॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! बहुत समय पहले की बात है, जब देवताओं और दानवों के युद्ध में तुम्हारे पिता शत्रुओं के बाणों से घायल हो गए थे। उस महायुद्ध में मैंने उनकी रक्षा की थी। इससे प्रसन्न होकर उन्होंने मुझे दो वरदान दिए थे।
 
'Raghunandan! It happened long ago, in the war between gods and demons, your father was pierced by the arrows of the enemies. I had protected him in that great war. Pleased with that, he had given me two boons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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