श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.18.17 
कच्चित्ते परुषं किंचिदभिमानात् पिता मम।
उक्तो भवत्या रोषेण येनास्य लुलितं मन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
क्या तुमने अभिमान या क्रोधवश मेरे पिता से कोई कठोर बात कही है, जिससे वे दुःखी हुए हैं?॥17॥
 
‘Did you say something harsh to my father out of pride or anger, which has saddened him?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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