श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.18.14 
कच्चिन्न किंचिद् भरते कुमारे प्रियदर्शने।
शत्रुघ्ने वा महासत्त्वे मातॄणां वा ममाशुभम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
क्या भरत के प्रिय पुत्र महाबली शत्रुघ्न या मेरी माताओं पर कोई विपत्ति नहीं आई है?॥14॥
 
‘Has no misfortune befallen the beloved son of Bharat, the mighty Shatrughna, or my mothers?॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd