श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का कैकेयी से पिता के चिन्तित होने का कारण पूछना,कैकेयी का कठोरतापूर्वक अपने माँगे हुए वरों का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.18.13 
शारीरो मानसो वापि कच्चिदेनं न बाधते।
संतापो वाभितापो वा दुर्लभं हि सदा सुखम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
क्या वह किसी शारीरिक रोग या मानसिक चिन्ता से पीड़ित है? क्योंकि मनुष्य को सदैव सुख ही सुख मिले, यह दुर्लभ है॥13॥
 
‘Is he suffering from some physical ailment or mental anguish (worry)? Because it is rare for a person to have only happiness all the time.॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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