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श्लोक 2.17.16  |
सर्वेषु स हि धर्मात्मा वर्णानां कुरुते दयाम्।
चतुर्णां हि वय:स्थानां तेन ते तमनुव्रता:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| धर्मात्मा श्री रामजी ने चारों वर्णों के लोगों पर उनकी स्थिति के अनुसार दया की, इसलिए वे सब उनके भक्त थे ॥16॥ |
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| The virtuous Shri Ram showed mercy to all people of the four castes according to their status, so all of them were his devotees. ॥16॥ |
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