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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 17: श्रीराम का राजपथ की शोभा देखते और सुहृदों की बातें सुनते हुए पिता के भवन में प्रवेश
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श्लोक 15
श्लोक
2.17.15
सर्वेषु स हि धर्मात्मा वर्णानां कुरुते दयाम्।
चतुर्णां हि वय:स्थानां तेन ते तमनुव्रता:॥ १५॥
अनुवाद
धर्मात्मा श्री रामजी ने चारों वर्णों के लोगों पर उनकी स्थिति के अनुसार दया की, इसलिए वे सब उनके भक्त थे ॥15॥
The virtuous Shri Ram showed mercy to all people of the four castes according to their status, so all of them were his devotees. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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