श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.16.45 
लाभो जनस्यास्य यदेष सर्वं
प्रपत्स्यते राष्ट्रमिदं चिराय।
न ह्यप्रियं किंचन जातु कश्चित्
पश्येन्न दु:खं मनुजाधिपेऽस्मिन्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
यदि यह सम्पूर्ण राज्य दीर्घकाल तक उसके हाथ में आ जाए, तो इस संसार के समस्त लोगों का महान् कल्याण होगा। उसके राजा होने पर न तो कभी कोई दुःखी होगा और न किसी को कोई दुःख सहना पड़ेगा।॥45॥
 
If this entire kingdom comes into his hands for a long time, then it will be a great benefit for all the people of this world. With him as the king, no one will ever be unhappy and no one will have to face any sorrow.'॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)