श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.16.43 
स राघवस्तत्र तदा प्रलापान्
शुश्राव लोकस्य समागतस्य।
आत्माधिकारा विविधाश्च वाच:
प्रहृष्टरूपस्य पुरे जनस्य॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस समय दूर-दूर से अयोध्या में आये हुए लोग बड़े आनन्द से भरकर भगवान् राम के विषय में नाना प्रकार की बातें कह रहे थे। भगवान् रघुनाथजी अपने विषय में कही जा रही उन सब बातों को सुनते रहे॥ 43॥
 
At that time, people from far-off places who had come to Ayodhya were filled with great joy and were conversing and talking about various things regarding Lord Rama. Lord Raghunath kept listening to all those things being said about himself.॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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