श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 40-42h
 
 
श्लोक  2.16.40-42h 
सर्वसीमन्तिनीभ्यश्च सीतां सीमन्तिनीं वराम्॥ ४०॥
अमन्यन्त हि ता नार्यो रामस्य हृदयप्रियाम्।
तया सुचरितं देव्या पुरा नूनं महत् तप:॥ ४१॥
रोहिणीव शशाङ्केन रामसंयोगमाप या।
 
 
अनुवाद
'वे स्त्रियाँ श्री राम की प्रियतमा सीमन्तिनी सीता को संसार की समस्त सौभाग्यवती स्त्रियों से श्रेष्ठ समझकर कहने लगीं - 'उस देवी सीता ने अवश्य ही पूर्वकाल में बहुत तप किया होगा, तभी तो वह चन्द्रमा से युक्त रोहिणी की भाँति श्री राम के साथ मिल गई है।' 40-41 1/2॥
 
'Those women, considering Seemantini Sita, the beloved of Shri Ram, as superior to all the fortunate women of the world, started saying - 'That Goddess Sita must have done a lot of penance in the past, that is why she has got the union of Shri Ram like Rohini united with the moon.' 40-41 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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