श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 16: सुमन्त्र का श्रीराम को महाराज का संदेश सुनाना,श्रीराम का मार्ग में स्त्री पुरुषों की बातें सुनते हुए जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.16.19 
यादृशी परिषत् तत्र तादृशो दूत आगत:।
ध्रुवमद्यैव मां राजा यौवराज्येऽभिषेक्ष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जैसे वहाँ कोई अंतरंग सभा बैठी है, वैसे ही दूत सुमन्त्रजी यहाँ पधारे हैं। निश्चय ही आज ही राजा मुझे युवराज पद पर अभिषिक्त करेंगे॥19॥
 
'Just as an intimate council is sitting there, similarly the messenger Sumantraji has arrived here. Surely today itself the King will anoint me as the crown prince.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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