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ramayan 2.15.9-10h: श्री रामजी के लिए चन्द्रमा की किरणों के समान कान्तिमान, श्वेत और पीत रंग का रत्नजटित एक सुन्दर कटोरा रखा गया था।   |   ramayan सर्ग 2.15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  2.15.9-10h 
चन्द्रांशुविकचप्रख्यं पाण्डुरं रत्नभूषितम्॥ ९॥
सज्जं तिष्ठति रामस्य वालव्यजनमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के लिए चन्द्रमा की किरणों के समान कान्तिमान, श्वेत और पीत रंग का रत्नजटित एक सुन्दर कटोरा रखा गया था।
 
For Shri Ram, an exquisite white and yellow colored gemstone-encrusted bowl with luster developed like the rays of the moon was beautifully kept. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)