श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.15.46 
ततो महामेघमहीधराभं
प्रभिन्नमत्यङ्कुशमत्यसह्यम्।
रामोपवाह्यं रुचिरं ददर्श
शत्रुञ्जयं नागमुदग्रकायम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन्होंने श्री रामजी के रथ पर शत्रुंजय नामक एक विशाल हाथी को आते देखा । वह विशाल मेघ से युक्त पर्वत के समान प्रतीत हो रहा था । उसके मस्तक से मद की धारा बह रही थी । वह लगाम से वश में नहीं आ रहा था । उसका वेग शत्रुओं के लिए अत्यंत असह्य था । उसके गुण उसके नाम के समान ही उत्तम थे ॥ 46॥
 
Thereafter he saw a huge elephant named Shatrunjaya coming in the chariot of Shri Ram. It looked like a mountain with a huge cloud. A stream of intoxication was flowing from its forehead. It could not be controlled by a rein. Its speed was extremely unbearable for the enemies. Its qualities were as good as its name.॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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