श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  2.15.25-26 
राममानय सूतेति यदस्यभिहितो मया॥ २५॥
किमिदं कारणं येन ममाज्ञा प्रतिवाह्यते।
न चैव सम्प्रसुप्तोऽहमानयेहाशु राघवम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'सुत! श्री राम को बुलाओ।' - मैंने जो कहा था, उसका पालन क्यों नहीं किया गया? क्या कारण है कि मेरी आज्ञा का उल्लंघन हो रहा है? मुझे नींद नहीं आ रही है। आप शीघ्र ही श्री राम को यहाँ बुलाएँ।'
 
'Sut! Call Shri Ram' - Why was what I told you not followed? What is the reason that my orders are being violated? I am not sleeping. You call Shri Ram here quickly.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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