श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  2.15.21-22h 
सोमसूर्यौ च काकुत्स्थ शिववैश्रवणावपि॥ २१॥
वरुणश्चाग्निरिन्द्रश्च विजयं प्रदिशन्तु ते।
 
 
अनुवाद
'ककुत्स्थानन्दन! चन्द्रमा, सूर्य, शिव, कुबेर, वरुण, अग्नि और इन्द्र तुम्हें विजय प्रदान करें।'
 
'Kakutsthanandana! May the Moon, Sun, Shiva, Kubera, Varuna, Agni and Indra grant you victory. 21 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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