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ramayan 2.15.20-21h: तत्पश्चात् वह राजा के शयन-कक्ष के पास जाकर खड़ा हो गया। भवन के बहुत निकट पहुँचकर, जहाँ बीच में केवल एक परदा था, वह वहाँ खड़ा होकर रघुकुल के राजा के गुणों का वर्णन करके तथा आशीर्वादपूर्वक उनकी स्तुति करने लगा।   |   ramayan सर्ग 2.15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  2.15.20-21h 
शयनीयं नरेन्द्रस्य तदासाद्य व्यतिष्ठत।
सोऽत्यासाद्य तु तद् वेश्म तिरस्करणिमन्तरा॥ २०॥
आशीर्भिर्गुणयुक्ताभिरभितुष्टाव राघवम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह राजा के शयन-कक्ष के पास जाकर खड़ा हो गया। भवन के बहुत निकट पहुँचकर, जहाँ बीच में केवल एक परदा था, वह वहाँ खड़ा होकर रघुकुल के राजा के गुणों का वर्णन करके तथा आशीर्वादपूर्वक उनकी स्तुति करने लगा।
 
Thereafter he went and stood near the king's bedroom. Reaching very close to the house where there was only a curtain in the middle, he stood there and started praising the King of the Raghukul by describing his qualities and by words of blessings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)