श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 15: सुमन्त्र का राजा की आज्ञा से श्रीराम को बुलाने के लिये उनके महल में जाना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  2.15.16-17 
रामं राज्ञो नियोगेन त्वरया प्रस्थितो ह्यहम्॥ १६॥
पूज्या राज्ञो भवन्तश्च रामस्य तु विशेषत:।
अयं पृच्छामि वचनात् सुखमायुष्मतामहम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मैं महाराज की आज्ञा से श्री राम को बुलाने तुरंत जा रहा हूँ। आप सभी महाराज के और विशेषतः श्री रामचंद्रजी के पूज्य हैं। उनकी ओर से मैं आप सभी अमर पुरुषों का कुशलक्षेम पूछ रहा हूँ। क्या आप सब कुशलपूर्वक हैं?॥16-17॥
 
‘I am going immediately to call Shri Ram with the permission of Maharaj. All of you are revered by Maharaj and especially Shri Ramchandraji. On his behalf I am asking about the well-being of all you immortal men. Are you all well?’॥16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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