श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.14.8 
सत्यं समनुवर्तस्व यदि धर्मे धृता मति:।
स वर: सफलो मेऽस्तु वरदो ह्यसि सत्तम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः यदि तुम्हारी बुद्धि धर्म में स्थित है, तो सत्य का आचरण करो। हे महामुनि! मैंने जो वरदान माँगा है, वह पूर्ण हो; क्योंकि उस वरदान को देने वाले आप स्वयं हैं।
 
‘Therefore if your intellect is situated in Dharma, then follow the truth. O great saint! The boon I have asked for should come true; because you yourself are the giver of that boon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)