श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.14.62 
सुमन्त्र राजा रजनीं रामहर्षसमुत्सुक:।
प्रजागरपरिश्रान्तो निद्रावशमुपागत:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
'सुमन्तराम! राजा श्रीराम के राज्याभिषेक के हर्ष में उत्साह से रात भर जागते रहे हैं। अब वे इतनी देर तक जागते रहने से थककर सो गए हैं।'
 
‘Sumantram! The king has been awake all night in excitement due to the joy of Shri Ram's coronation. He has fallen asleep now because he is tired from staying awake for so long. 62.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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