श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.14.6 
सरितां तु पति: स्वल्पां मर्यादां सत्यमन्वित:।
सत्यानुरोधात् समये वेलां स्वां नातिवर्तते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'सत्य को प्राप्त हुआ समुद्र, केवल सत्य का ही पालन करके, पर्व आदि के समय भी अपनी छोटी सी सीमा-तट का उल्लंघन नहीं करता॥6॥
 
'The ocean that has attained truth, by following the truth only, does not transgress its small boundary-shore even at the time of festivals etc.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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