श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  2.14.49 
वेदा: सहाङ्गा विद्याश्च यथा ह्यात्मभुवं प्रभुम्।
ब्रह्माणं बोधयन्त्यद्य तथा त्वां बोधयाम्यहम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
'जैसे चारों वेद अपने छह अंगों और समस्त विद्याओं सहित स्वयंभू भगवान ब्रह्मा को जगाते हैं, उसी प्रकार आज मैं तुम्हें जगा रहा हूँ॥ 49॥
 
'Just as the four Vedas with their six limbs and all the knowledge awaken the self-born Lord Brahma, in the same way today I am awakening you.॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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