श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  2.14.46 
तत: सूतो यथापूर्वं पार्थिवस्य निवेशने।
सुमन्त्र: प्राञ्जलिर्भूत्वा तुष्टाव जगतीपतिम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सुत सुमन्तराम पहले की तरह हाथ जोड़कर राजा की स्तुति करने लगे।
 
Suta Sumantram began to praise the King in his palace as before with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)