श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.14.34 
इमे गङ्गोदकघटा: सागरेभ्यश्च काञ्चना:।
औदुम्बरं भद्रपीठमभिषेकार्थमाहृतम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
(उनसे कहो कि श्री राम के राज्याभिषेक की सारी सामग्री एकत्रित हो गई है) ये गंगाजल से भरे हुए कलश रखे हैं, ये स्वर्ण कलश समुद्र से लाए गए जल से भरे हुए हैं। यह अंजीर की लकड़ी से बना भद्रपीठ है, जो अभिषेक के लिए लाया गया है (इस पर श्री राम को बिठाकर उनका अभिषेक किया जाएगा)॥34॥
 
‘(Tell them that all the material for Shri Ram's coronation has been collected) These pots filled with Gangajal are kept, these golden pots are filled with water brought from the oceans. This is Bhadrapeeth made of fig wood, which has been brought for Abhishek (Shri Ram will be anointed by making him sit on this).॥ 34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd