श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.14.33 
तमुवाच महातेजा: सूतपुत्रं विशारदम्।
वसिष्ठ: क्षिप्रमाचक्ष्व नृपतेर्मामिहागतम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब महाबली वसिष्ठ ने अत्यंत चतुर सारथिपुत्र सुमन्तराम से कहा, 'सुत! तुम शीघ्र ही राजा को मेरे आगमन की सूचना दो।'
 
Then the mighty Vasishtha said to the extremely clever charioteer's son Sumantram, 'Sut! You inform the King of my arrival soon.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd