श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.14.32 
स त्वपश्यद् विनिष्क्रान्तं सुमन्त्रं नाम सारथिम्।
द्वारे मनुजसिंहस्य सचिवं प्रियदर्शनम्॥३२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उसने राजा के सुन्दर सचिव और सारथी सुमन्तराम को भीतरी महल के द्वार पर उपस्थित देखा, जो अभी-अभी अन्दर से निकला था।
 
There he saw the King's handsome secretary and charioteer Sumantram, present at the inner palace door, who had just emerged from inside. 32.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd