श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.14.3 
आहु: सत्यं हि परमं धर्मं धर्मविदो जना:।
सत्यमाश्रित्य च मया त्वं धर्मं प्रतिचोदित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'ज्ञानी पुरुष कहते हैं कि सत्य ही श्रेष्ठ धर्म है। उसी सत्य का आश्रय लेकर मैंने तुम्हें धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी है।॥3॥
 
'The wise men say that truth is the best religion. Taking the help of that truth I have inspired you to follow the religion.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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