श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.14.29 
तां पुरीं समतिक्रम्य पुरंदरपुरोपमाम्।
ददर्शान्त:पुरं श्रीमान् नानाध्वजगणायुतम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रनगरी अमरावती के समान सुन्दर उस नगरी को पार करके श्रीमान् वशिष्ठजी राजा दशरथ के अन्तःकक्ष में गये, जहाँ सहस्त्रों ध्वजाएँ लहरा रही थीं।
 
After crossing that city which looked as beautiful as Indranagari Amaravati, Shriman Vasishthaji visited the inner chamber of King Dasharath where thousands of flags were fluttering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)