श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.14.20 
तत: पापसमाचारा कैकेयी पार्थिवं पुन:।
उवाच परुषं वाक्यं वाक्यज्ञा रोषमूर्च्छिता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पापिनी कैकेयी वार्तालाप का सार समझकर क्रोध से मूर्छित सी हो गई और पुनः कठोर शब्दों में राजा से बोली-॥20॥
 
Thereafter the sinful Kaikeyi, understanding the essence of the conversation, almost fainted with anger, spoke to the king again in harsh words -॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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