श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  2.14.16-17h 
रामाभिषेकसम्भारैस्तदर्थमुपकल्पितै:।
राम: कारयितव्यो मे मृतस्य सलिलक्रियाम्॥ १६॥
सपुत्रया त्वया नैव कर्तव्या सलिलक्रिया।
 
 
अनुवाद
‘मेरे मरने के बाद तुम श्री राम के अभिषेक के लिए एकत्रित की गई सामग्री से श्री राम के हाथों से मुझे जलांजलि (तर्पण) दिलाना; परंतु अपने पुत्र सहित मुझे जलांजलि मत देना।॥16 1/2॥
 
‘After my death, get me the Jalanjali (offering of water) from the hands of Shri Ram using the material that was collected for Shri Ram’s anointment; but do not offer Jalanjali to me along with your son.॥ 16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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