श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.14.15 
प्रयाता रजनी देवि सूर्यस्योदयनं प्रति।
अभिषेकाय हि जनस्त्वरयिष्यति मां ध्रुवम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'देवी! रात्रि बीत गई। सूर्योदय होते ही सब लोग मुझसे अवश्य कहेंगे कि श्री राम का राज्याभिषेक शीघ्र करो।' 15॥
 
'Goddess! The night passed. As soon as the sun rises, everyone will definitely ask me to hurry up to perform the coronation of Shri Ram. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)