श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 14: कैकेयी का राजा को अपने वरों की पूर्ति के लिये दुराग्रह दिखाना, राजा की आज्ञा से सुमन्त्र का श्रीराम को बुलाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.14.13 
विकलाभ्यां च नेत्राभ्यामपश्यन्निव भूमिप:।
कृच्छ्राद् धैर्येण संस्तभ्य कैकेयीमिदमब्रवीत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
व्याकुल नेत्रों से कुछ भी न देख पाने के कारण राजा दशरथ ने बड़ी कठिनाई से अपने को रोका और कैकेयी से इस प्रकार बोले -॥13॥
 
Unable to see anything with his troubled eyes, King Dasharatha with great difficulty restrained himself and spoke to Kaikeyi as follows -॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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