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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 13: राजा का विलाप और कैकेयी से अनुनय-विनय
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श्लोक 9
श्लोक
2.13.9
शूरश्च कृतविद्यश्च जितक्रोध: क्षमापर:।
कथं कमलपत्राक्षो मया रामो विवास्यते॥ ९॥
अनुवाद
'मैं उन कमलनेत्र भगवान् राम को, जो वीर, विद्वान्, क्रोध को जीतने वाले और क्षमाशील हैं, कैसे देश निकाला दे सकता हूँ?॥ 9॥
'How can I banish the lotus-eyed Lord Rama who is valiant, learned, conqueror of anger and full of forgiveness?॥ 9॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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