| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 13: राजा का विलाप और कैकेयी से अनुनय-विनय » श्लोक 6 |
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| | | | श्लोक 2.13.6  | स्वर्गेऽपि खलु रामस्य कुशलं दैवतैरहम्।
प्रत्यादेशादभिहितं धारयिष्ये कथं बत॥ ६॥ | | | | | | अनुवाद | | 'हाय! स्वर्ग में भी जब देवता मुझसे श्री राम का कुशल-क्षेम पूछेंगे, तो मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा? यदि मैं कह दूँ कि मैंने उन्हें वन में भेज दिया है, तो उसके बाद वे मेरे विषय में जो अपमानजनक शब्द कहेंगे, उन्हें मैं कैसे सहन कर सकूँगा? इसके लिए मुझे बहुत दुःख है॥ 6॥ | | | | 'Alas! Even in heaven, when the gods will ask me about the well-being of Shri Ram, what answer will I give them? If I say that I have sent him to the forest, then how will I be able to bear the insulting words they will say about me after that? I am very sorry for this.॥ 6॥ | | ✨ ai-generated | | |
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