| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 13: राजा का विलाप और कैकेयी से अनुनय-विनय » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 2.13.12  | यदि दु:खमकृत्वा तु मम संक्रमणं भवेत्।
अदु:खार्हस्य रामस्य तत: सुखमवाप्नुयाम्॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | यदि मैं श्री रामजी को, जो वनवास के योग्य नहीं हैं, वनवास का कष्ट दिए बिना इस संसार से चला जाऊँ, तो मुझे बहुत प्रसन्नता होगी॥ 12॥ | | | | 'If I could depart from this world without causing the pain of exile to Shri Rama, who is not worthy of suffering it, then I would be very happy.॥ 12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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