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श्लोक 11
श्लोक
2.13.11
सुखानामुचितस्यैव दु:खैरनुचितस्य च।
दु:खं नामानुपश्येयं कथं रामस्य धीमत:॥ ११॥
अनुवाद
'मैं उन बुद्धिमान श्री रामजी को कैसे देख सकता हूँ, जो सदैव सुख भोगने के योग्य हैं और कभी दुःख या कष्ट सहने के योग्य नहीं हैं?॥ 11॥
'How can I see the wise Sri Rama, who is always fit to enjoy happiness and never fit to suffer sorrow, suffering?॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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