| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 13: राजा का विलाप और कैकेयी से अनुनय-विनय » श्लोक 10 |
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| | | | श्लोक 2.13.10  | कथमिन्दीवरश्यामं दीर्घबाहुं महाबलम्।
अभिराममहं रामं स्थापयिष्यामि दण्डकान्॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | 'जिनका शरीर नीलकमल के समान चमकता है, जिनकी भुजाएँ लंबी हैं और जिनका बल अपार है, उन सुन्दर भगवान राम को मैं दण्डक वन में कैसे भेज सकूँगा?॥10॥ | | | | 'How will I be able to send that beautiful Lord Rama, whose body glows like a blue lotus, whose arms are long and whose strength is immense, to the Dandaka forest?॥10॥ | | ✨ ai-generated | | |
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