श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.12.98 
महार्हवस्त्रसम्बद्धो भूत्वा चिरसुखोचित:।
काषायपरिधानस्तु कथं रामो भविष्यति॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
जो भगवान् राम सदैव बहुमूल्य वस्त्र धारण करते हैं और बहुत समय से सुखपूर्वक अपना समय व्यतीत करते हैं, वे भगवा वस्त्र पहनकर वन में कैसे रह सकेंगे?॥ 98॥
 
'How will Lord Rama, who always wore costly clothes and who has spent his time in comfort since a long time, be able to live in the forest wearing saffron coloured clothes?॥ 98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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