श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.12.91 
मया रामेण च त्यक्तं शाश्वतं सत्कृतं गुणै:।
इक्ष्वाकुकुलमक्षोभ्यमाकुलं पालयिष्यसि॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
'जब असंख्य गुणों से संपन्न, सनातन और क्लेशरहित यह इक्ष्वाकुकुल मेरे और श्री रामजी द्वारा त्यागे जाने पर शोक से व्याकुल हो जाएगा, तब उस अवस्था में तुम इसका पालन करोगे॥91॥
 
'When this Ikshvakukul, blessed with innumerable qualities, eternal and without any troubles, will become distraught with grief after being abandoned by me and Shri Ram, then in that state you will follow it. 91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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