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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 12: महाराज दशरथ की चिन्ता, विलाप, कैकेयी को फटकारना, समझाना और उससे वैसा वर न माँगने के लिये अनुरोध करना
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श्लोक 90
श्लोक
2.12.90
कौसल्यां च सुमित्रां च मां च पुत्रैस्त्रिभि: सह।
प्रक्षिप्य नरके सा त्वं कैकेयि सुखिता भव॥ ९०॥
अनुवाद
'कैकेयी! मुझे, कौशल्या, सुमित्रा तथा मेरे तीनों पुत्रों को नरक के समान दुःख में डालकर तुम्हें स्वयं प्रसन्न होना चाहिए।
'Kaikeyi! After putting me, Kausalya, Sumitra and my three sons in such a state of grief that is equal to hell, you yourself should be happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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